Thursday, December 23, 2010

गुलाबी नगरी जयपुर में 2013 से दौडेगी मेट्रो


जयपुर। विश्व के पर्यटन मानचित्र पर प्रमुख रूप से उभरी गुलाबी नगरी जयपुर में वर्ष 2013 से मेट्रो दौड़ेगी। राजस्थान में जयपुर प्रथम शहर होगा जहां मेट्रो परियोजना का काम शुरू हो चुका है।
प्रस्तावित परियोजना के मुताबिक अगले दो साल में मेट्रो की पहली ट्रेन यात्रियों के लिए शुरू हो जाएगी। यूं तो करीब 300 वर्ष पूर्व [1727] में अपनी स्थापना काल से ही जयपुर चर्चित रहा और अब मेट्रो परियोजना के लिए चर्चा में है।
गुलाबी शहर की योजनाबद्ध बनावट, विशाल भवन, पर्याप्त जल, राष्ट्रीय राजधानी की निकटता तथा विस्तार की विपुल संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए जयपुर को विश्व स्तरीय शहर का दर्जा देने का काम शुरू हुआ है।
राजस्थान की राजधानी को आधुनिकतम स्वरूप देने की दिशा में ही वर्तमान राज्य सरकार की महत्वपूर्ण महत्वाकांक्षी परियोजना 'जयपुर मेट्रो रेल परियोजना' है। इस परियोजना के क्रियांवयन के लिए जयपुर मेट्रो रेल कारपोरेशन लि., का गठन किया गया है।
मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने परियोजना के श्रीगणेश के मौके पर कहा कि महानगर की आवश्यकताओं को देखते हुए जयपुर में मेट्रो रेल परियोजना शुरू की जा रही है। अनुमान है कि वर्ष 2025 तक जयपुर की आबादी 75 लाख हो जाएगी और 2031 तक 82 लाख से अधिक हो जाएगी।
दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लि. के अध्यक्ष डा. ई.श्रीधरन के अनुसार, मेट्रो रेल सरकार के लाभ की योजना नहीं है बल्कि इससे लोगों के आवागमन में सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल परियोजना के अनुभव के आधार पर कह सकते है कि इस परियोजना के पूर्ण होने पर करीब एक लाख वाहन सड़क पर नहीं होंगे क्योंकि इनसे आने जाने वाले लोग मेट्रो रेल का उपयोग करेंगे। जयपुर विकास प्राद्यिकरण सूत्रों के अनुसार शहर में मेट्रो रेल आने से यह नगर दिल्ली, कोलकाता, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरू आदि शहरों की श्रेणी में आ जाएगा। इंस्टीट्यूट फार कंपीटीटिवनेस, नई दिल्ली द्वारा हाल ही में जारी रिपोर्ट के अनुसार बेहतर प्रशासन, नगर निगम की कुशलता और अपराध की कम दर के कारण जयपुर देश के प्रमुख 10 नगरों की श्रेणी में है।
उन्होंने कहा कि दस वर्षो में शहर में वाहनों की संख्या दो लाख से बढ़कर 16 लाख हो गई है। प्रति वर्ष यहां करीब 15 लाख पर्यटक आते हैं। इस दृष्टि से आवागमन की सुविधा के लिए मेट्रो रेल आवश्यक है।
सूत्रों के अनुसार जयपुर मेट्रो रेल परियोजना का कार्य दो चरणों में पूरा होगा। इसकी अनुमानित लागत 9100 करोड रुपये आंकी गई है। प्रथम चरण में कोरीडोर का निर्माण कार्य मानसरोवर से चांदपाल तक होगा। इस पर 1250 करोड रुपये व्यय होने का अनुमान है।
प्रथम चरण के करीब 10 किलोमीटर मार्ग पर नौ स्टेशन होंगे। यह स्टेशन हैं:- मानसरोवर, न्यू आतिश मार्केट, विवेक विहार, श्यामनगर, रामनगर, सिविल लाइन्स, रेलवे स्टेशन, सिंधी कैम्प और चांदपोल।
प्रथम चरण का प्रारंभिक कार्य नवम्बर, 2010 में शुरू कर दिया गया है। इसके लिए 18 निर्माण कंपनियों के प्रतिनिधि मानसरोवर से चांदपोल तक के मार्ग और कार्य की विविधता की जानकारी प्राप्त कर चुके है। बताया गया है कि मानसरोवर से चांदपोल तक 91 प्रतिशत भू क्षेत्र में किसी प्रकार की कठिनाई नहीं है।
सूत्रों का कहना है कि जयपुर मेट्रो रेल परियोजना के प्रथम चरण का कार्य वर्ष 2013 में पूरा करने का लक्ष्य है।
सूत्रों ने कहा कि मात्र नौ प्रतिशत भूमि अवाप्त की जानी है। इसके लिए जयपुर विकास प्राधिकरण के अधिकारियों द्वारा कार्रवाई की जा रही है। रेलवे द्वारा इस परियोजना के लिए पूर्ण सहयोग का विश्वास दिलाया गया है। रेलवे से मेट्रो रेल व ओवरब्रिज के कार्यो में समन्वय के लिए रेलवे के ही मुख्य अभियंता अश्विनी सक्सेना की सेवाएं ली गई है।
प्रथम चरण के कार्यो के लिए 1250 करोड रुपये की व्यवस्था की जानी है। इसमें से राज्य सरकार द्वारा 600 करोड, जयपुर विकास प्राधिकरण द्वारा 150 करोड, राजस्थान आवासन मंडल और रिको लि., द्वारा 100-100 करोड उपलब्ध कराएगा और जयपुर मेट्रो रेल कारपोरेशन द्वारा 300 करोड रुपये का ऋण लिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि अजमेर रोड पर यातायात के दबाव को कम करने के लिए सोडाला से अजमेर पुलिस तक एलीवेटेड सडक का निर्माण कराया जा रहा है। इस सडक का निर्माण दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन लि., के माध्यम से करवाया जा रहा है।
जयपुर मेट्रो के लिए जयपुर विकास प्राधिकरण और दिल्ली मेट्रो रेल कारपोरेशन के मध्य दो अक्टूबर 2010 को समझौते पर हस्ताक्षर किए गए जिसकी अनुमानित लागत 200 करोड रुपये बताई गई थी और यह कार्य दो वर्ष में पूरा करने का लक्ष्य है।
प्राधिकरण सूत्रों के अनुसार द्वितीय चरण में कारीडोर प्रथम में प्रस्तावित अम्बावाडी से सीतापुरा और कारीडोर द्वितीय का बचा हुआ भाग चांदपोल से बडी चौपड तक क्रियांवित करने पर करीब आठ सौ पचास करोड रुपये खर्च होंगे। इसमें से 20 प्रतिशत का अनुदान भारत सरकार द्वारा तथा 20 प्रतिशत अनुदान राज्य सरकार द्वारा देय है। शेष राशि निजी भागीदारी द्वारा अंश पूंजी व ऋण के रूप में विनियोजित किया जाना प्रस्तावित है।

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