Thursday, December 23, 2010

जाली नोटों की तस्करी में डॉक्टर समेत 3 गिरफ्तार


ंलखनऊ [जासं]। कम समय में अमीर बनने की चाहत में गोमतीनगर के डॉ. संतोष कुमार बाजपेयी जाली नोटों के सौदागर बन बैठे। तस्करों से संपर्क हुआ तो फाइनेंसर बन तस्कर दम्पती के साथ नकली नोटों का कारोबार शुरू कर दिया। गोरखधंधे से गुरुवार को पर्दा उठा और क्राइम ब्रांच ने डॉक्टर समेत तीन को गिरफ्तार कर लिया। इन लोगों के पास से नौ हजार रुपये के नकली नोट बरामद हुए हैं।
सीतापुर के रामकोट थाना क्षेत्र स्थित सुल्तानपुर के डॉ. संतोष बाजपेयी एक बीएएमएस डॉक्टर हैं। वह गोमतीनगर के खरगापुर में रहकर क्लीनिक चलाते हैं। क्लीनिक ठीक से नहीं चली तो अमीर बनने के लिए उन्होंने बलिया के रसड़ा थाना क्षेत्र के हीता का पुरवा के अजय तिवारी उर्फ अरुण के साथ जाली नोटों का कारोबार शुरूकिया। इस धंधे में अरुण की पत्‍‌नी मेनका भी थी। क्राइम ब्रांच को खबर मिली कि नेपाल के वीरगंज का तस्कर फिरोज लखनऊमें तीन लोगों के माध्यम से जाली नोटों की तस्करी करा रहा है। गुरुवार को क्राइम ब्रांच की टीम ने गोमतीनगर में अजय व मेनका को दबोच लिया। दोनों के पास से 5500 रुपये के जाली नोट बरामद हुए। पूछताछ में दोनों ने बताया कि डॉ. संतोष बाजपेयी की मदद से वह लोग लखनऊ व आसपास के जिलों में जाली नोट चलाते हैं। इस पर पुलिस ने उन्हें भी गिरफ्तार कर लिया। उनकी क्लीनिक से 3500 रुपये के जाली नोट मिले हैं।
एएसपी क्राइम ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि गिरोह का सरगना अजय तिवारी है। वह डॉ.संतोष की क्लीनिक में जाली नोट लाकर रखता था। वहीं से जाली नोट बाजार में पहुंचाए जाते थे। यह लोग जाली नोट बाजार में ले जाकर कुछ सामान खरीदते थे और असली नोट लेकर आ जाते थे। अजय के खिलाफ बलिया के विभिन्न थानों में कई मुकदमे दर्ज हैं। तीनों के पास से जाली नोटों के अलावा तीस हजार रुपये के असली नोट व दो मोबाइल फोन भी मिले हैं। यह लोग पिछले पांच साल से जाली नोटों की तस्करी कर रहे हैं। क्राइम ब्रांच ने तीनों के मोबाइल फोन का कॉल ब्योरा खंगाला तो कई अन्य संदिग्ध लोगों के बारे में जानकारी मिली है।

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